तो आज आरंभ करते हैं —
Dark World Universe – Day 2
एक गहन और विस्तृत अध्याय, जो पहले दिन की ऊर्जा को आगे बढ़ाता है।
इस भाग में दोनों दिशाओं की शक्तियाँ पहली बार एक-दूसरे से संवाद करती हैं —
और Om Trivedi, साधक और साक्षी, उस अनुभव के माध्यम बनते हैं।
“Day 2: The Convergence Ritual” के आरंभ में आने वाला
एक गूढ़ श्लोक (Mystical Sanskrit Invocation),
जो भारतीय तंत्र और पश्चिमी ओकल्ट — दोनों की आत्मा को एक सूत्र में बाँधता है।
यह श्लोक Dark World Universe के द्वितीय अध्याय का उद्घाटन करेगा।
🕉️ प्रारंभिक श्लोक — “छायासङ्गम मंत्र”
(Invocation of the Converging Shadows)
असतोऽन्धकारात् प्रविशामि रात्रौ,
रात्रेः परे यः महाकालरूपः।
तमोऽपि तं तेजसा संयुनक्ति,
स एव सत्यं — स एव ब्रह्म॥
Transliteration:
Asato’ndhakārāt praviśāmi rātrau,
rātreḥ pare yaḥ mahākālarūpaḥ।
tamo’pi taṁ tejasā saṁyunakti,
sa eva satyaṁ — sa eva brahma॥
Meaning (Om Trivedi’s Interpretation):
“मैं असत्य से अंधकार में उतरता हूँ,
और उस अंधकार से परे जो महाकाल का रूप है,
वही मुझे प्रकाश से जोड़ता है।
वही सत्य है — वही ब्रह्म है।”
यह श्लोक Convergence Ritual के भाव को पूरी तरह व्यक्त करता है —
जहाँ अंधकार, प्रकाश का विरोध नहीं करता;
बल्कि उसी के गर्भ में छिपे ब्रह्म को प्रकट करता है।
🌑 Dark World Universe – Day 2: The Convergence Ritual
(An Om Trivedi Chronicle)
“जब दो छायाएँ एक हो जाती हैं, तब ब्रह्मांड का मौन भी बोल उठता है…” — Om Trivedi
रात का तीसरा पहर था।
गंगा का प्रवाह स्थिर लग रहा था — मानो समय स्वयं ध्यान में बैठ गया हो।
मणिकर्णिका की अग्नियाँ अब नीली लपटों में बदल चुकी थीं।
अघोरी, जिसे मैंने कल मिला था, अब मौन था।
उसकी दृष्टि आकाश में टिकी थी, और उसकी उंगलियों के इर्द-गिर्द काले धुएँ के धागे लिपटे थे।
मैं — Om Trivedi, उसके सामने बैठा था।
मेरे भीतर एक हलचल थी; एक कंपन, जो सामान्य नहीं था।
राख की गंध अब धूप में बदल रही थी — संकेत कि कोई बड़ा संयोग घटने वाला है।
अचानक अघोरी ने धीमी आवाज़ में कहा —
“आज रात, पूरब और पश्चिम एक साथ जप करेंगे।
दो दिशाएँ, एक उद्देश्य।”
मैंने पूछा, “क्या ये वही मिलन है जिसका आपने संकेत दिया था?”
वह बोला —
“हाँ, यही Convergence Ritual है।
आज Dark World Grid पहली बार सक्रिय होगी।”
🌘 Varanasi — The Eastern Chant
अघोरी ने अपने चारों ओर एक वलय बनाया —
राख, खोपड़ी और दीपक से बनी एक यंत्र-रेखा।
उसके भीतर उसने ‘काली-मंत्र’ का जप शुरू किया।
आवाज़ गहरी थी, गंगा की लहरों जैसी।
मैंने आँखें बंद कीं —
और अचानक मुझे ऐसा लगा कि मैं इस घाट पर नहीं, बल्कि किसी और लोक में हूँ।
मेरे चारों ओर केवल ध्वनि थी, पर वो ध्वनि प्रकाश जैसी दिख रही थी।
हर शब्द ऊर्जा में बदलता जा रहा था,
और ऊर्जा ने एक रूप लिया — काली छाया का सूर्य, जिसका केंद्र रिक्त था।
अघोरी बोला —
“यह है Adya-Tattva, वही बिंदु जहाँ तंत्र का ब्रह्म जागता है।”
🜏 London — The Western Invocation
उसी समय, लंदन के underground chamber में,
चार Occult Masters मोमबत्तियों के घेरे में खड़े थे।
उनकी भाषा लैटिन थी, पर उनके उच्चारण में वही लय थी जो वाराणसी में गूंज रही थी।
उनके सामने Sigil of the Black Sun रखा था,
और उसके केंद्र में एक दर्पण —
जो हर मंत्र के साथ काला होता जा रहा था।
वह दर्पण अचानक कंपकंपाया,
और उसमें गंगा की छवि दिखाई दी।
Varanasi और London — अब दो नहीं, एक ही दृश्य बन गए थे।
उनमें से एक ने कहा,
“Lucifer est Lumen. Darkness is the Gateway.”
और उसी क्षण, अघोरी ने उच्चारण किया —
“महाकालः सर्वं ग्रसति।”
दोनों आवाज़ें मिलकर एक नई ध्वनि बनी —
वह थी The Cosmic Tone of the Dark World।
🌌 Om Trivedi’s Vision — The Moment of Convergence
मैंने उस ध्वनि को अपने भीतर उतरते देखा।
मेरे सामने जो ऊर्जा लहर उठी, उसने धरती को छू लिया।
आकाश में काले और नीले रंग का एक विशाल वृत्त बना —
मानो ब्रह्मांड के दो सिरों ने एक-दूसरे को पहचान लिया हो।
मेरे भीतर एक दृश्य चमका —
एक प्राचीन सभ्यता, जो ना भारतीय थी ना पश्चिमी।
वह थी The Original Cult of the Shadow,
जहाँ से दोनों संस्कृतियाँ उत्पन्न हुई थीं।
वह सभ्यता अब जाग रही थी।
मुझे एक आवाज़ सुनाई दी —
“Om Trivedi, तुम केवल साक्षी नहीं,
तुम वह लेखा हो, जिसमें दोनों संस्कृतियों का ज्ञान लिखा जाएगा।
यह Dark World Universe तुम्हारे माध्यम से प्रकट होगा।”
मैंने हाथ जोड़े।
मेरे शरीर से धुएँ की पतली रेखाएँ उठने लगीं,
जो आकाश में घूमकर एक आकृति बनीं —
एक त्रिकोण, जिसके भीतर सूर्य और चंद्रमा दोनों थे।
अघोरी ने उसे देखकर कहा —
“अब संतुलन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
आगे जो भी होगा, वह ब्रह्मांड के संतुलन को पुनर्लेखित करेगा।”
🕯️ Om Trivedi Thought (Signature Line)
“अंधकार और प्रकाश की लड़ाई झूठ है।
जो उन्हें जोड़ सके, वही सच्चा साधक है।”
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