Dark World Universe – Day 3: The Whispering Void

साधक Om Trivedi

आज हम प्रवेश करते हैं —
Dark World Universe — Day 3,
जहाँ The Convergence Ritual के बाद ब्रह्मांडीय संतुलन में हलचल शुरू होती है।
अब कथा केवल ऊर्जा नहीं, बल्कि अनुभव बन जाती है —
और आप, Om Trivedi, उसके साक्षी नहीं, संचालक बनते हैं।





🌑 Dark World Universe – Day 3: The Whispering Void

(An Om Trivedi Chronicle)

“जब अंधकार बोलने लगे, तो जानो — मौन ने तुम्हें स्वीकार कर लिया है…” — Om Trivedi


🕉️ प्रस्तावना — शून्य का संदेश

शून्यात् उद्भवति ध्वनि:।
ध्वनितो जायते स्वर:।
स्वरेण सृष्टि: पुनः आरभ्यते॥

अर्थ:
“शून्य से ध्वनि उत्पन्न होती है,
ध्वनि से स्वर जन्म लेता है,
और स्वर से सृष्टि फिर से आरंभ होती है।”


The Convergence Ritual की रात के बाद का दिन अजीब रूप से स्थिर था।
वाराणसी की गलियाँ शांत थीं, पर वह मौन सामान्य नहीं था
मानो हर ईंट, हर दीपक, हर लहर कुछ कहने को तैयार हो।
अघोरी अब वहाँ नहीं था।
उसकी जगह राख से बना एक मंडल रह गया था —
जिसके केंद्र में एक काली बिंदी थी, जो धड़क रही थी।

मैं — Om Trivedi, उस मंडल के सामने बैठा था।
मेरी दृष्टि उस बिंदु पर अटक गई थी।
वह बिंदु देखने में छोटा था, पर जैसे-जैसे मैं ध्यान करता गया,
वह फैलने लगा — इतना कि पूरा दृश्य उसी में समा गया।

और फिर… मैं शून्य में था।






🌘 The Void — The Space Between Light and Shadow

वहाँ न समय था, न दिशा।
केवल एक कंपन था —
मानो ब्रह्मांड अपनी ही ध्वनि में डूब गया हो।

एक गहरी आवाज़ आई —

“Om Trivedi… तुमने द्वार खोल दिया है।
अब जो देखोगे, वह केवल तुम्हारा नहीं रहेगा —
यह Dark World तुम्हारे माध्यम से बोलेगा।”

मेरे चारों ओर ऊर्जा के गोले बनने लगे।
कुछ गोले नीले थे — जो ज्ञान और प्रकाश के प्रतीक थे।
कुछ काले थे — जो अंधकार और रहस्य के।
और दोनों मिलकर एक अनंत घूर्णन में बदल गए।

अचानक एक आकृति उभरी —
वह न पूर्ण मनुष्य थी, न देवता, न राक्षस।
उसकी आँखों में गंगा की तरह प्रवाह था और माथे पर Luciferic Sigil की आभा।

वह बोली —

“पूर्व और पश्चिम के मिलन ने मुझे जन्म दिया है।
मैं हूँ Sakshinetr,
वह जो सब देखता है, पर किसी पक्ष में नहीं।”


🜏 The Vision of Sakshinetr

उसने अपना हाथ उठाया।
उसकी उँगलियों से प्रकाश की रेखाएँ निकलीं, जो आकाश में फैल गईं।
हर रेखा किसी स्थल से जुड़ रही थी —
Tibet, Egypt, Stonehenge, Kailash, Vatican —
हर वह जगह जहाँ किसी न किसी रूप में अंधकार की साधना हुई थी।

वह बोली —

“ये सभी बिंदु अब एक ही ग्रिड पर हैं, Om Trivedi।
तुम उस ग्रिड के केंद्र में बैठे हो।
यह है The Dark World Lattice
जहाँ से सभी संस्कृतियाँ अपने रहस्यों को पोषित करती हैं।”

मैंने पूछा, “इस ग्रिड का उद्देश्य क्या है?”
Sakshinetr मुस्कुराई।

“संतुलन।
जब कोई एक पक्ष अत्यधिक प्रबल हो जाता है —
प्रकाश या अंधकार —
तब यह ग्रिड स्वयं समायोजन करती है।”


🌌 Om Trivedi’s Realization — The Inner Awakening

मेरे भीतर एक स्पंदन उठा।
मैंने समझा — यह कोई बाहरी युद्ध नहीं,
बल्कि मानव चेतना के भीतर चल रहा संतुलन है।

हर व्यक्ति के भीतर एक Varanasi है — जो तंत्र, त्याग और भक्ति का प्रतीक है,
और एक London Chamber — जो ज्ञान, शक्ति और रहस्य का केंद्र है।
Dark World Universe इन्हीं दोनों का संगम है।

मैंने ध्यान लगाया, और देखा —
मेरे भीतर भी वही ग्रिड उभर रही थी।
उसके केंद्र में एक बिंदु था — वही जो अघोरी की राख में देखा था।
अब वह बिंदु मेरा हृदय चक्र बन गया था।

मैंने सुना —

“अब तुम केवल लेखक नहीं, साधक हो।
Dark World अब तुम्हारे माध्यम से बोलेगा।”


🕯️ Om Trivedi Thought (Signature Line)

“शून्य भयावह नहीं है;
वह तो वह स्थान है जहाँ सृष्टि फिर से स्वयं को समझती है।”



Post a Comment

0 Comments