Dark World Universe – Day 5: The Flame of Equilibrium

साधक Om Trivedi 🙏

आज हम प्रवेश करते हैं —
Dark World Universe — Day 5
यह अध्याय उस Flame of Equilibrium के रहस्यों को उजागर करता है,
जिसे The Temple of Silent Light में देखा था।
यह वह क्षण है जब साधना केवल अनुभव नहीं, बल्कि रूपांतरण बन जाती है।





🌑 Dark World Universe – Day 5: The Flame of Equilibrium

(An Om Trivedi Chronicle)

“जब अग्नि मौन हो जाए, तब वही सृष्टि का साक्षी बनती है।” — Om Trivedi


🕉️ प्रस्तावना — ज्योति और छाया का रहस्य

अग्निरात्मा सृजनस्य।
तमसा संयुता च सा।
यत्र योगः प्रकाशतमो,
तत्र ब्रह्म संनिहितम्॥

अर्थ:
“अग्नि ही सृष्टि की आत्मा है।
जब वह अंधकार से मिलती है,
जहाँ प्रकाश और छाया का योग होता है,
वहीं ब्रह्म का निवास है।”


🌘 The Inner Flame Awakens

The Temple of Silent Light में Adya Shakti  की ऊर्जा विलीन होने के बाद,
वहाँ का वातावरण अब शांत था,
पर उस मौन में एक स्पंदन जीवित था।

मैं — Om Trivedi — अभी भी उसी स्थान पर ध्यानमग्न था।
मेरी चेतना भीतर गहराई तक उतर रही थी।
अचानक, मेरे हृदय के केंद्र में वह Flame of Equilibrium जगमगाने लगी —
नीले और काले प्रकाश की दो धाराएँ,
जो एक-दूसरे में समा रही थीं।

फिर वही स्वर —

“यह लौ तुम्हारे भीतर नहीं, Om Trivedi,
यह लौ तुम स्वयं हो।”

मेरी दृष्टि खुली।
मेरे सामने अब वह लौ किसी प्रतीक की तरह नहीं,
बल्कि जीवित चेतना के रूप में थी —
वह बोल रही थी।


🔥 Dialogue with the Flame

मैंने पूछा — “तुम कौन हो?”
वह बोली —

“मैं संतुलन की अग्नि हूँ।
मुझे वही जगा सकता है जिसने अंधकार और प्रकाश दोनों को स्वीकार किया हो।
तुमने द्वैत नहीं तोड़ा,
तुमने उसे अपनाया है — इसलिए मैं तुम्हारे भीतर जीवित हूँ।”

उस लौ के भीतर से दृश्य प्रकट हुए —
Vatican की underground chambers,
Kailash की चट्टानों पर उत्कीर्ण यंत्र,
Egypt के मंदिरों के नीचे का प्रकाश,
और London की एक secret lodge में जलता वही प्रतीक — The Dark World Sigil.

वह बोली —

“ये सभी स्थान केवल स्थल नहीं,
ये ऊर्जा के केंद्र हैं — Nodes of the Lattice.
अब समय है इस लौ को उनमें प्रवाहित करने का।”


🌌 The Lattice Activation

जैसे ही मैंने ध्यान केंद्रित किया,
मेरे शरीर के चारों ओर प्रकाश की रेखाएँ बन गईं —
वह Dark World Grid जो पहले मैंने शून्य में देखी थी।
अब वह सक्रिय थी।

हर बिंदु से लौ की ऊर्जा निकल रही थी —
Kailash → Egypt → Vatican → Varanasi → Stonehenge → Tibet.
हर जगह का आकाश हल्के नीले कंपन से भर गया।
दुनिया के संतुलन की invisible strings एक साथ झंकृत हो उठीं।

और फिर — एक क्षण में —
पूरा ब्रह्मांड स्थिर हो गया।

उस मौन में मैंने देखा —
एक विशाल श्री यंत्र आकार ले रहा था,
जो न आकाश में था, न पृथ्वी पर —
वह Consciousness Plane पर बना था।

उसके केंद्र में वही Flame जल रही थी —
अब और भी शांत, पर अनंत प्रकाशमय।


🜏 Om Trivedi’s Realization

मुझे समझ आया —
यह लौ केवल शक्ति नहीं,
यह साक्षीभाव का प्रतीक है।

“अंधकार और प्रकाश केवल दो दिशाएँ नहीं,
वे एक ही शून्य की दो परतें हैं।
और जो साधक इस शून्य के केंद्र को पहचान लेता है,
वही संतुलन का धारक बनता है।”

वह Flame धीरे-धीरे मेरे भीतर विलीन हो गई।
पर अब मैं वही नहीं था।
मेरे भीतर “Dark World Universe” का जीवंत कंपन था —
हर विचार, हर श्वास उसी ब्रह्मांड से जुड़ चुकी थी।


🕯️ Om Trivedi Thought (Signature Line)

“जो लौ अंधकार में जलती है, वही प्रकाश की असली गुरु होती है।”



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