Dark World Universe – Day 4: The Temple of Silent Light

साधक Om Trivedi 🙏

आज हम प्रवेश करते हैं —
Dark World Universe — Day 4
यह अध्याय उस बिंदु से आरंभ होता है जहाँ शून्य ने स्वर लिया था
अब वह ऊर्जा, जो पहले केवल कंपन थी, अपना स्वरूप प्रकट करने लगी है।
यह चरण है — “The Temple of Silent Light”
जहाँ अंधकार में छिपे प्रकाश का रहस्य खुलता है।





🌑 Dark World Universe – Day 4: The Temple of Silent Light

(An Om Trivedi Chronicle)

“जब शून्य में प्रकाश की गूंज सुनाई दे, तो जानो —
सृष्टि तुम्हारे भीतर नया जन्म ले रही है।” — Om Trivedi


🕉️ प्रस्तावना — मौन की रचना

मौनं ब्रह्म स्वरूपं।
यत्र ध्वनि अपि प्रणवायते।
प्रकाशोऽपि तमसा संयुज्यते।
तत्रैव साक्षी जागरूकः॥

अर्थ:
“मौन ही ब्रह्म का रूप है।
जहाँ ध्वनि ओंकार बन जाती है,
जहाँ प्रकाश अंधकार से मिल जाता है,
वहीं साक्षी जागता है।”


🌘 The Call from the Void

Day 3 के अंत में जो शून्य खुला था, वह अब स्वर बन गया था।
उस स्वर में एक दिशा थी —
उत्तर, जहाँ हिमालय की चोटियाँ चाँदनी में स्थिर थीं।

मुझे लगा किसी ने भीतर से कहा —

“Om Trivedi, अब उत्तर की ओर बढ़ो।
वहीं है The Temple of Silent Light
जहाँ अंधकार का अर्थ समाप्त होता है।”

मैंने वाराणसी की राख को माथे पर लगाया और निकल पड़ा।
रास्ते में कोई नहीं था, पर हवा में मंत्र गूंज रहे थे —
कभी संस्कृत, कभी लैटिन, कभी ऐसी भाषा जो शायद किसी युग की भी नहीं थी।

तीन दिनों की यात्रा के बाद मैं पहुँचा —
हिमालय के उस बिंदु पर, जहाँ बर्फ भी गहरी नीली दिखती थी।
वहाँ एक गुफा थी — न दरवाज़ा, न दीवारें —
केवल एक अदृश्य मंदिर, जो चेतना से देखा जा सकता था।


🜏 The Temple Reveals Itself

जब मैंने ध्यान किया, तो शून्य में रूप उभरने लगा।
मंदिर किसी धातु का नहीं था — वह प्रकाश की आकृति था,
जो बीच-बीच में अंधकार में बदलता, फिर वापस उजाले में आता।

उसके द्वार पर लिखा था —

“Lux Silens — The Light that Speaks in Silence.”

अंदर प्रवेश करते ही मुझे एक परिचित ऊर्जा का अहसास हुआ —
वही कंपन जो Convergence Ritual की रात था।
वहाँ कोई मूर्ति नहीं थी,
सिर्फ एक काला क्रिस्टल था जो भीतर से सफेद आभा दे रहा था।

मैंने उसे छूते ही देखा —
मेरे चारों ओर हजारों दृश्य घूमने लगे:
अघोरी, London के Occultists, Sakshinetr, और फिर एक नई आकृति —
एक स्त्री, जिसकी आँखों में समंदर और माथे पर त्रिनेत्र का तेज था।

वह बोली —

“मैं हूँ Adya Shakti, आद्या शक्ति
वही ऊर्जा जिसने सबको जन्म दिया।
मैं ही प्रकाश में अंधकार हूँ, और अंधकार में प्रकाश।
Om Trivedi, अब तुम ‘द्वैत’ के साक्षी नहीं —
तुम अब ‘संतुलन’ के साधक’ हो।”


🌌 The Revelation — The Inner Temple

उसके शब्दों के साथ ही, मंदिर की दीवारें गायब हो गईं।
अब वह प्रकाश मेरे भीतर प्रवेश कर रहा था।
मैंने देखा —
मेरे भीतर एक सूक्ष्म मंदिर उभर आया है,
जहाँ एक काली और एक उजली लौ साथ-साथ जल रही हैं।

वह बोली —

“यह लौ बुझनी नहीं चाहिए, Om Trivedi।
यह है The Flame of Equilibrium.
जब यह संतुलित रहेगी, तब ब्रह्मांड भी संतुलित रहेगा।”

मैंने आँखें खोलीं।
मुझे समझ आ गया —
Dark World Universe किसी बाहरी सत्ता की रचना नहीं,
बल्कि साधना का आंतरिक ब्रह्मांड है।
हर साधक, जो अपने भीतर संतुलन पा लेता है,
वह इसी मंदिर का यात्री है।


🕯️ Om Trivedi Thought (Signature Line)

“अंधकार और प्रकाश के बीच जो मौन है,
वही असली ज्योति है — वही ब्रह्म का द्वार।”



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