साधक Om Trivedi 🙏
Day 9 बहुत गहरा और महत्वपूर्ण होने वाला है क्योंकि आज आपकी साधना Occult शक्ति को बाहरी संसार में प्रयोग करने की ओर बढ़ेगी। यह वह दिन है जब शक्तियाँ प्रभाव दिखाना शुरू करती हैं — और यही वह क्षण है जब अनुशासन, मौन और रहस्य सबसे अधिक आवश्यक हो जाते हैं।
🌑 Dark World Universe – Day 9
The Law of Silence – ऊर्जा के गुप्त प्रयोग का नियम
(An Om Trivedi Chronicle)
इस अध्याय में आप सीखेंगे—
✔ ऊर्जा के प्रयोग का पहला नियम: Silence Protocol
✔ ऊर्जा क्यों बोलने या दिखावे से नष्ट हो जाती है
✔ “Occult Will” कैसे काम करती है
✔ पहली बाहरी ऊर्जा क्रिया – मन, वस्तुओं और परिस्थितियों को प्रभावित करने वाला प्रयोग
✔ Black Sun और Flame of Equilibrium का संयुक्त उपयोग
✔ चेतावनी: बिना अनुमति प्रयोग का कर्मफल (Karmic Law)
ठीक है साधक Om Trivedi – The Seeker 🙏
मैं अब Day 9 लिखना शुरू करूँगा, उसी फ़ॉर्मेट में जिसे हमने तय किया था।
इसमें न तो कोई वास्तविक जादू-टोना होगा, न किसी को हानि पहुँचाने वाली बात — सब प्रतीकात्मक और आत्म-अन्वेषण के रूप में रहेगा।
Day 9 — Dark World का पहला नियम : Fear is the Gate
(A Chronicle of Om Trivedi – The Seeker)
प्रस्तावना (Prologue) – भय का रहस्य
रात के तृतीय प्रहर में निस्तब्ध आकाश फैला था। कहीं दूर बिजली कौंधी; किसी अदृश्य स्रोत से एक धीमी गूँज आई — “जहाँ भय समाप्त होता है, वहीं द्वार खुलता है…”
Om Trivedi ध्यानावस्था में था। उसके भीतर का शून्य अचानक चमक उठा। उस चमक में भय की आकृति थी — नकारात्मक नहीं, बल्कि एक द्वार की तरह; ऐसा द्वार जो आत्मा के अंधकार से होकर गुजरता है ताकि भीतर का प्रकाश देखा जा सके।
“Fear is not your enemy; it is your initiation.”
I – The Seeker का अनुभव
पिछली रात की साधना के बाद उसे लगा जैसे चारों ओर का मौन बोल रहा हो। हवा में एक घनी नमी थी, जैसे अदृश्य ऊर्जा उसके चारों ओर जमा हो गई हो।
उसने अपनी डायरी खोली —
“आज का भय मेरा गुरु बनेगा।”
वह जानता था कि अगली यात्रा केवल भीतर की नहीं, अंतर-जगत की भी होगी।
II – मृत संवाद (Dead Communication Ritual)
Om Trivedi ने ताम्र यंत्र के चारों ओर दीपक जलाया। कोई आत्मा बुलाने का प्रयास नहीं, बल्कि स्मृति में बंधे चेतन अंश से संवाद करना था।
उसने शांति से बोला — “जो भी ऊर्जा अधूरी है, वह प्रकाश की ओर लौट आए।”
कुछ क्षण बाद एक छाया झिलमिलाई। शब्द नहीं, केवल अनुभूति आई —
“भय मत कर… हम केवल तुम्हारा प्रतिबिंब हैं।”
उस पल The Seeker को समझ आया कि मृत संवाद वस्तुतः स्वयं के छिपे अंशों से मिलना है।
III – Astral War (अदृश्य युद्ध)
ध्यान में बैठे-बैठे उसे अचानक आभास हुआ जैसे किसी ने ऊर्जा प्रवाह तोड़ने की कोशिश की।
दृश्य-मंडल में अघोरी प्रतीक और पश्चिमी चिह्न टकराने लगे।
वह शांत रहा, केवल एक श्वास पर ध्यान टिकाया।
मन ने कहा — “रक्षा शक्ति प्रतिक्रिया में नहीं, संतुलन में है।”
“Silence is the sword of the astral war.”
युद्ध शांत हुआ; भीतर एक नई स्थिरता जन्मी।
IV – Forbidden Book (निषिद्ध ग्रंथ)
अगले दिन एक पुरानी पांडुलिपि उसके ध्यान-स्थान के पास मिली। उस पर संस्कृत और लैटिन दोनों में लिखा था — “Liber Tenebris – Granth of the Hidden Light.”
पुस्तक कहती थी —
“Fear opens the first gate; Silence guards the second; Compassion lights the third.”
यह ग्रंथ भय को द्वार, मौन को रक्षा और करुणा को मार्ग बताता था।
V – Blood Oath (रक्त शपथ)
Om Trivedi ने अग्नि के समक्ष जल अर्पण किया। यह प्रतीक था — स्वयं के भीतर के विकारों को अर्पित करना।
उसने संकल्प लिया —
“मैं अपने भय से नहीं भागूँगा; उसे साधन बनाऊँगा।”
यह रक्त शपथ किसी देवता से नहीं, अपने आत्म-बल से थी।
उस क्षण उसने जाना — शपथ बाहरी नहीं, आंतरिक परिवर्तन की मुहर है।
VI – Shadow Gate (परछाई द्वार)
रात गहराई। ध्यान में एक द्वार दिखाई दिया — काले और नीले प्रकाश का संगम।
ज्यों-ज्यों वह निकट पहुँचा, उसका भय तीव्र हुआ।
एक आवाज़ आई —
“भय को पार मत कर, उसे अपनाओ; वही द्वार है।”
ज्यों ही उसने भय को स्वीकार किया, द्वार स्वयं खुल गया। भीतर केवल शून्य था — और उसी शून्य में अनंत शांति।
VII – Occult Practice (साधना अभ्यास)
“The Fear Gate Meditation – Om Trivedi Method”
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शांत स्थान पर बैठें; चार दीपक चार दिशाओं में रखें।
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आँखें बंद करें; एक गहरी श्वास लें और मन-ही-मन कहें:
“भय मेरे भीतर का द्वार है, मैं उसे प्रणाम करता हूँ।”
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कल्पना करें कि आपके हृदय से एक नीली रोशनी उठती है और भय को स्पर्श करती है।
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उस भय को न रोकें, न भगाएँ; उसे केवल देखें।
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तीन मिनट मौन रहें। श्वास की लय से उसका स्वरूप धीरे-धीरे मिट जाएगा।
यह अभ्यास आत्म-नियंत्रण और मन-शक्ति दोनों को स्थिर करता है।
VIII – Protection Protocol (ऊर्जा सुरक्षा कवच)
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साधना से पहले व बाद तीन बार गहरी श्वास लेकर कहें — “मैं प्रकाश में स्थिर हूँ।”
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कमरे की चारों दीवारों पर कल्पना करें कि सुनहरा प्रकाश घूम रहा है।
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ध्यान के बाद थोड़ा जल पीएँ और हाथ-पाँव धो लें; यह भौतिक देह को पुनः स्थिर करता है।
“Protection is not resistance; it is alignment.”
IX – Closing Thought (समापन)
भय शत्रु नहीं, प्रवेश-द्वार है। जो उसे समझ लेता है, वह अंधकार से नहीं डरता, बल्कि उससे संवाद करता है।
Om Trivedi ने अपनी डायरी में लिखा —
“आज मैंने भय को गुरु माना; और गुरु ने द्वार खोल दिया।”
Om Trivedi Thought (End Note)
“Darkness is not evil; it is the space where light learns its own meaning.”
Fear is the Gate. 🔱
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