Dark World Universe – Day 10 – Illuminati vs Tantra : अदृश्य युद्ध की शुरुआत

साधक Om Trivedi 🙏


Dark World Universe – Day 10 – Illuminati vs Tantra : अदृश्य युद्ध की शुरुआत

उत्तरदायित्व : शक्ति से पहले परीक्षा आती है

Dark Mentor : जिसे दुनिया ‘शत्रु’ कहती है

(An Om Trivedi Chronicle)





I – प्रस्तावना

रात्रि अपनी नमी में भारी थी। हवा में राख और नीली गंध थी। दूर किसी मंदिर के पीछे की दिशा में एक सूक्ष्म कम्पन था – जैसे समय स्वयं रुका हो।
साधक Om Trivedi मौन में बैठे थे। उनकी आंखों के भीतर प्रकाश और अंधकार दोनों एक साथ घूम रहे थे। यह वही रात्रि थी जब Fear was the Gate खुल चुका था। अब वह द्वार स्थिर नहीं था; वह जीवित था।


II – अदृश्य युद्ध : Illuminati का आगमन

कक्ष की दीवारें धीमे-धीमे कांपने लगीं। पश्चिमी जादू की शक्ति – Luciferian Seal – उत्तर दिशा से प्रकट हुई।
अंधकार के भीतर एक आवाज़ थी,

“The Light is ours, the world is ours.”

Om Trivedi ने उत्तर दिया –

“प्रकाश किसी का नहीं, वह चेतना है।”

दो ऊर्जा एक-दूसरे से टकराईं;
एक में तर्क, शक्ति और नियंत्रण था।
दूसरी में मौन, श्रद्धा और तंत्र की धारा।
अदृश्य युद्ध आरम्भ हुआ।

साधक के चारों ओर नीली रेखाएं घूमने लगीं। यह काली ज्योति थी – ऊर्जा जो किसी दिशा की दास नहीं।
उनकी उँगलियों से बीज-मंत्र निकला –

“ॐ भैरवाय नमः। शून्ये तत्त्वं मम सिद्धिः।”

वातावरण में एक विद्युत-तरंग दौड़ी। Illuminati symbols — त्रिकोण, सर्वदर्शी नेत्र, 13th seal — सब ध्वस्त होने लगे।


III – अंतर्मुख साधना : शक्ति की परीक्षा

Om Trivedi के भीतर का युद्ध बाहर से भी अधिक कठिन था।
भय फिर से लौट आया — क्या यह मेरा मार्ग सही है?

उन्होंने वही नियम स्मरण किया –

“Fear is the Gate.”

उन्होंने अपनी चेतना को नाड़ी-मंडल से बाहर भेजा।
शरीर स्थिर, पर आत्मा गतिशील।
उन्होंने पहली बार Astral Projection को अनुभूत किया।
वह अपने शरीर को देख रहे थे — नीचे, निस्तब्ध, पर जीवित।

ऊपर उन्हें एक पुस्तक दिखाई दी – “Liber Noctis” — निषिद्ध ग्रंथ।
पुस्तक स्वयं खुली, और एक श्लोक प्रकट हुआ:

“जो भीतर के शून्य को देख सके, वही ब्रह्म के द्वार पर दस्तक दे सकता है।”

Om Trivedi ने श्लोक पढ़ते ही एक कंपन महसूस किया।
शरीर में ऊर्जा का ज्वार उमड़ा।
उनकी देह के चारों ओर एक आभा-कवच बन गया।


IV – Dark Mentor का प्रकट होना

जब चेतना लौटी, उनके सामने धुएँ की परत से एक आकृति बनी।
चेहरा अस्पष्ट, पर नेत्रों में सहस्राब्दियों का मौन।
वह बोला –

“तू डरता नहीं, इसलिए द्वार ने तुझे स्वीकार किया।”
“अब जान ले, शक्ति के पहले उत्तरदायित्व आता है।”

Om Trivedi ने पूछा, “आप कौन?”
वह मुस्कराया, “मुझे कोई नाम मत दे। लोग मुझे शत्रु कहते हैं, पर मैं तेरे भीतर का अंधकार हूँ जो प्रकाश बनना चाहता है।”

वह था – Dark Mentor

उसने अपने हाथ उठाए, और हवा में प्रकाश का गोला बना – आधा काला, आधा सफेद।

“यह संतुलन है। तंत्र और लूसिफेरियन दोनों एक ही स्रोत से जन्मे हैं। अंतर केवल दिशा का है।”


V – Tantra vs Luciferian Magic : संघर्ष और संतुलन

Mentor के आदेश पर Om Trivedi ने दोनों शक्तियों को एक साथ धारण किया।
दाहिने हाथ में मंत्र, बाएं हाथ में प्रतीक।
आवाज़ गूंजी –

“ॐ ह्रीं क्रीं कालिकायै नमः। Lux In Tenebris Lucet.”
(अंधकार में भी प्रकाश चमकता है)

आकाश में दो ऊर्जा-गोले टकराए।
समय जैसे कुछ क्षणों के लिए जम गया।
फिर सब शांत हो गया।
Mentor बोला –

“अब तू तैयार है। द्वार खुल चुका है, पर याद रख – जो इसे पार करेगा, वह लौट नहीं सकता।”

Om Trivedi ने मौन में सिर झुकाया।


VI – Energy Gate Activation

भूमि के नीचे एक नाद उठा – AUM NADA BINDU KALA.
श्री यन्त्र के केंद्र से प्रकाश फूटा।
द्वार खुला – एक वृत्ताकार ऊर्जा-पोर्टल, नीले और स्वर्णिम प्रकाश से घिरा।
Mentor बोला,

“यह तुझे अगले लोक में ले जाएगा, जहाँ ज्ञान भी अस्त्र है और भक्ति भी विज्ञान।”

Om Trivedi ने मंत्र जपा और पोर्टल में प्रवेश किया।
अंधकार में लय घुल गई।


VII – साधना और सुरक्षा प्रोटोकॉल

जो पाठक इस अध्याय तक पहुँचे हैं, उनके लिए Dark Mentor की एक साधना:

१ – मौन ध्यान (5 मिनट)
बैठें, आँखें बंद करें।
भय को महसूस करें, उससे भागें नहीं।

२ – श्वास साधना
श्वास लें और मन में जपें – “Fear is the Gate.”
श्वास छोड़ें और जपें – “Silence is the Key.”

३ – ऊर्जा कवच
हाथ जोड़कर कहें –

“ॐ महाकाल प्रभुः मम रक्षा करोतु। मायां विजयेत् प्रकाशः।”
(“मेरे भीतर का प्रकाश मेरी रक्षा करे, माया पर विजय दे।”)

४ – समापन ध्यान
ध्यान दें कि भय अब कम्पन बन चुका है –
वह शत्रु नहीं, गुरु है।


VIII – अगले द्वार का संदेश

Mentor की आवाज़ फिर गूंजी –

“जब तू अगले लोक में पहुँचेगा, वहाँ स्मृति नहीं होगी, केवल सत्य होगा। Day 11 वहीं से शुरू होगा।”


Signature Line:
“जहाँ भय समाप्त होता है, वहीं साधक जन्म लेता है।”
Om Trivedi (The Seeker)





Post a Comment

0 Comments