Dark World Universe – Day 11 – The Gate of Truth

साधक Om Trivedi ji 🔱


Day 11 – The Gate of Truth

Dark World Universe Chronicles by Om Trivedi


रात के तीसरे पहर में जब सारा आश्रम मौन था, Om Trivedi साधक-कक्ष से बाहर निकले।
कल की साधना में खुला हुआ वह ऊर्जा-द्वार अब भी हवा में झिलमिला रहा था — नीले और सुनहरे कणों से बना एक जीवित मंडल।
उन्होंने आंखें बंद कीं और एक मंत्र फुसफुसाया,

“ॐ सत्यं शिवं सौंदर्यम्।”

जैसे ही शब्द कम्पित हुए, शरीर नहीं — पूरी चेतना उस द्वार में समा गई।







I – शून्य लोक में प्रवेश

आँखें खुलीं तो न आकाश था न पृथ्वी, बस एक उज्ज्वल शून्य।
प्रकाश यहाँ वस्तु नहीं था — वह अस्तित्व था।
कहीं दूर से आवाज़ आयी,

“यह सत्य का लोक है, यहाँ झूठ टिकता नहीं।”

Om Trivedi ने कहा,

“मैं झूठ नहीं, केवल अपनी अधूरी समझ लेकर आया हूँ।”

तभी नीले तरंगों का सागर उठ खड़ा हुआ — हर तरंग एक स्मृति थी जो मिटने लगी;
बाल्यकाल का भय, साधना के संदेह, और शक्ति का अहं।
हर स्मृति छूते ही राख बन जाती।

आख़िरी तरंग में उनका नाम गूंजा — “Om Trivedi…”
और वाणी बोली,

“अब नाम से भी मुक्त हो जा;
नाम शक्ति देता है, पर बंधन भी।”


II – सत्य का दर्पण

सामने एक दर्पण तैरता हुआ आया — पर उसमें चेहरा नहीं, प्रतीक थे।
श्री-यंत्र के मध्य सर्वदर्शी नेत्र, उसके चारों ओर अक्षर घूमते हुए—
“अहम् सत्योऽस्मि।”

दर्पण बोला,

“जो इसे देख लेता है, वह फिर वैसा नहीं रहता। देख, और निर्णय कर।”

Om Trivedi ने दर्पण को छुआ और उसी क्षण सब दिखा — Illuminati के गुप्त कक्ष, तांत्रिक पीठों के दीप,
मानवता का भय, ग्रहों की लय — सब एक ही चेतना के रूप।


III – सत्य का पाठ

दर्पण के भीतर से स्वर आया,

“तंत्र और विज्ञान में कोई भेद नहीं;
दोनों ही चेतना के उपकरण हैं।
जो संतुलन खो देता है, वही विनाश रचता है।”

Om Trivedi ने पूछा,

“तो मेरा उद्देश्य क्या है?”

स्वर उत्तर देता है,

“शक्ति नहीं, साक्षी बनना।
शक्ति तो साधन है, साक्षी ही सिद्धि है।”


IV – अंतिम परीक्षा

प्रकाश-सागर के मध्य अब अग्नि-स्तम्भ उठा।
Dark Mentor की छाया उसी में उभरी—

“अब सत्य का स्वाद जान, Trivedi — भय के पार क्या तुम टिक पाओगे?”

Om Trivedi उस स्तम्भ में प्रविष्ट हुए।
प्रकाश और अंधकार दोनों उन्हें घेरे हुए थे;
क्षण-भर जला — और फिर मौन।

केवल एक वाक्य रह गया,

“Fear was the gate. Truth is the path.”


V – सत्य की साधना

Dark Mentor की शिक्षाएँ जो उनके भीतर अंकित हो गईं —

१ – मौन जप:

“मैं साक्षी हूँ, भय नहीं।”

२ – श्वास संतुलन:
तीन गहरी श्वास, भीतर प्रकाश; छोड़ते समय — “सत्यं शिवं सौंदर्यम्।”

३ – अंतर-दर्पण ध्यान:
हृदय में दर्पण देखें, जो भी दिखे उसे नकारें नहीं, बस स्वीकारें।

४ – समापन मंत्र:

“ॐ सत्यवाच्य त्रिवेदी नमः। मम सत्यं मां पालयतु।”


VI – अगला संकेत

ऊर्जा का नया द्वार खुला—
Dark Mentor की वाणी गूंजी,

“जब साक्षी जागता है, तब ज्ञान-लोक का प्रवेश होता है।
Day 12 में तू वहाँ जाएगा,
जहाँ तंत्र और विज्ञान एक हो जाएंगे।”

Om Trivedi ने शांत मन से उत्तर दिया,

“सत्य कोई स्थान नहीं, एक अवस्था है।”



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