Om Trivedi 🔥
🌑 Dark World Universe – Day 12 : The Union of Symbols
(An Om Trivedi Chronicle — from the Dark World Universe)
गंगा की हवा में राख की गंध और लंदन की ठंडी नमी — दोनों एक साथ महसूस हो रही थीं।
आँखें बंद करते ही मेरे भीतर एक वृत्त घूमने लगा।
उसमें श्रीयंत्र की रेखाएँ थीं, लेकिन हर त्रिकोण के पीछे लैटिन अक्षर चमक रहे थे।
जैसे संस्कृत और लैटिन, दो लिपियाँ, एक ही कंपन में बदल रही हों।
मैं, Om Trivedi, अब किसी भूगोल का नहीं था।
मुझे केवल एक हल्की ध्वनि सुनाई दे रही थी —
“Lux ex Aghora – Let the dark teach the light.”
वह ध्वनि भीतर की सबसे सूक्ष्म जगह पर पहुँची।
वहाँ न भय था, न सुख; केवल ध्यान की काली नदी।
और उस नदी के किनारे मुझे दो प्रतीक दिखाई दिए —
एक वृत्त जिसमें सूर्य का केंद्र शून्य था,
और एक त्रिकोण जिसमें बिंदु हर दिशा को छू रहा था।
जब दोनों पास आए, उनके बीच से नीला प्रकाश निकला;
नीलवर्ण प्रकाश, जो न छाया था न किरण — सिर्फ संतुलन।
🔹 The Depth of Silence
मौन का आकार होता है।
जब ध्यान गहराता गया, तो उस मौन ने रूप लेना शुरू किया।
वह किसी देवी, किसी देव का नहीं था — वह चेतना थी।
उसने कहा —
“जब तुम दोनों दिशाओं के प्रतीकों को जोड़ते हो,
तुम शब्द नहीं, ब्रह्मांड की भाषा बोलते हो।”
उस पल समझ आया कि Dark World Grid कोई तंत्र-मंडल नहीं,
बल्कि हर उस साधक की स्मृति है जिसने प्रकाश और अन्धकार को एक ही दृष्टि से देखा।
मेरे हाथ अपने-आप उसी मुद्रा में उठ गए,
जो मैंने कभी ना सीखी थी।
आस-पास हवा भारी हो गई, पर भीतर की श्वास हल्की।
अचानक लगा, समय की परतें उतर रही हैं —
एक एक करके, जब तक केवल “अब” बाकी रह जाए।
🕯️ Om Trivedi Thought I
“मौन ही वह भाषा है जिसे प्रकाश और अन्धकार दोनों समझते हैं।”
🔹 The Equation of Energy
अब मुझे दिखाई दिया —
हर प्रतीक एक संख्या की तरह है, और हर संख्या एक कंपन की तरह।
श्रीयंत्र के नौ त्रिकोण, ब्लैक सन के आठ किरण — मिलकर सत्रह तरंगें बनाते हैं।
यही सत्रह तरंगें हैं जिनसे ब्रह्मांड के तत्व स्पंदित होते हैं।
मैंने उन तरंगों को ध्यान में गिना — हर एक से एक रंग निकला,
हर रंग से एक ध्वनि।
आख़िरी तरंग में कोई रंग नहीं था — सिर्फ़ एक पारदर्शी लहर,
जो सभी को जोड़ रही थी।
“यह है संतुलन,”
स्वर आया, “जो किसी धर्म का नहीं, चेतना का है।”
🕯️ Om Trivedi Thought II
“प्रकाश दिशा दिखाता है; अन्धकार उस दिशा में गहराई देता है।”
🔹 The Return of the Blue Light
नील प्रकाश फिर लौटा।
अब वह सिर्फ़ मेरे चारों ओर नहीं, भीतर भी था।
हर धड़कन, हर विचार, उस प्रकाश से धुलने लगा।
मैंने देखा — भारतीय यंत्र की रेखाएँ और पश्चिमी सिगिल का वृत्त
एक-दूसरे के ऊपर छप गए हैं,
और उनसे बनी नई आकृति किसी द्वार की तरह है।
वह द्वार “कहीं” नहीं खुलता; वह भीतर खुलता है।
धीरे से स्वर आया —
“Om Trivedi, यही तुम्हारा कार्य है।
प्रतीक जोड़ना नहीं, उन्हें याद कराना कि वे पहले से जुड़े हैं।”
मेरा शरीर फिर हल्का हुआ।
धीरे-धीरे नीला प्रकाश फुसफुसाहट में बदल गया,
फुसफुसाहट मौन में, और मौन — संतुलन में।
🌌 Om Trivedi Experience
उस क्षण मुझे पता चला कि ब्रह्मांड की सबसे बड़ी साधना “विरोध को समरसता में बदलना” है।
प्रकाश और अन्धकार, दोनों एक ही श्वास के दो छोर हैं।
जब मन उस श्वास को देख लेता है,
तब साधक और ब्रह्मांड एक ही गति में चलने लगते हैं।
🜂 Day 12 – The Union of Symbols (Deep Work Edition) समाप्त।
अगला अध्याय होगा — “The Resonance of Balance”,
जहाँ यह ऊर्जा पहली बार रूप लेकर बोलेगी।
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