ठीक है — मैं उसी “Deep Work Edition” पैटर्न में आगे बढ़ाता हूँ, भाषा, प्रवाह और गहराई वैसी ही रखूँगा।
🌑 Dark World Universe – Day 13 : The Resonance of Balance
(An Om Trivedi Chronicle — from the Dark World Universe)
नील प्रकाश के शांत होने के बाद भी वह तरंग भीतर चलती रही।
हर श्वास में एक नई ध्वनि थी — कभी मंत्र जैसी, कभी विद्युत की हल्की गूँज।
मैं — Om Trivedi — अब केवल साधक नहीं, दो युगों की प्रतिध्वनि था।
रात के तीसरे पहर वाराणसी के ऊपर बादल टूटे।
घाट की जलधारा में तारे झिलमिलाए, और उन्हीं तीरों की तरह किसी दूर देश से कुछ ऊर्जा लौट आई।
वह वही Resonance थी — दो प्रतीकों का संयुक्त स्पंदन।
🔹 The Tone of Equilibrium
जब यंत्र और सिगिल का संगम हुआ, तब ब्रह्मांड ने मौन नहीं रखा।
एक सूक्ष्म नाद उठा — “अहम् सर्वभूतानां नाभिः।”
उसके साथ ही मेरे चारों ओर की हवा हल्की नीली हो गई।
उस नाद की तरंगें धीरे-धीरे चार दिशाओं में फैलने लगीं।
पूर्व में वे मंत्र बन गईं,
पश्चिम में वे विचार,
उत्तर में विज्ञान,
और दक्षिण में अनुभूति।
“यह है संतुलन की प्रतिध्वनि,”
स्वर आया, “जहाँ हर दिशा अपनी विपरीत दिशा में गूँजती है।”
🔹 The Mirror of Reality
नील प्रकाश में अब दर्पण-सा दृश्य उभर रहा था।
उसमें मैं स्वयं को देख रहा था,
पर प्रतिबिम्ब का चेहरा मेरा नहीं था — वह युगों का सम्मिश्रण था।
कभी वह एक ऋषि-सदृश आकृति बनता,
कभी किसी आधुनिक साधक का।
तभी समझ आया — संतुलन का अर्थ एक रूप में ठहरना नहीं,
हर रूप को स्वीकारना है।
🕯️ Om Trivedi Thought I
“जब चेतना अपने ही प्रतिबिम्ब को पहचान लेती है, तब द्वैत स्वयं समाप्त हो जाता है।”
🔹 The Breath of Resonance
मैंने श्वास भीतर खींची।
हर साँस एक स्वर, हर छोड़ना एक अर्थ।
धीरे-धीरे भीतर से आवाज़ आई —
“प्रकाश और अन्धकार के बीच की दूरी उतनी ही है जितनी एक श्वास की।”
वह पल पूरा ब्रह्मांड एक लय में साँस लेता हुआ लगा।
गंगा की लहरें और थेम्स का प्रवाह फिर एक तरंग बन गए।
🕯️ Om Trivedi Thought II
“संतुलन स्थिरता नहीं, सतत् स्पंदन है।”
🔹 The Gift of Silence
नील प्रकाश अब मंद हुआ और उसकी जगह चाँदी-सी धुंध ने ले ली।
उस धुंध में एक प्रतीक उभरा — वृत्त के भीतर बिंदु, और उसके चारों ओर असीम रेखाएँ।
वह वही “Symbol of Equilibrium” था, पर अब स्थिर नहीं।
वह गति में था, जैसे किसी संगीत का दृश्य रूप।
मैंने अनुभव किया कि यह प्रतीक कोई चिह्न नहीं,
बल्कि एक चेतन स्वरूप है — जो हर साधक में जाग सकता है।
🌌 Om Trivedi Experience
उस रात मैंने समझा — संतुलन का अर्थ समापन नहीं, निरंतर संवाद है।
हर भावना, हर विचार, हर विरोध,
ब्रह्मांड के संगीत की कोई एक धुन मात्र है।
जब मन उस संगीत को सुन लेता है,
तब जीवन और साधना एक ही हो जाते हैं।
🜂 Day 13 — The Resonance of Balance समाप्त।
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