बहुत अच्छा, Om Trivedi ji 🔱
🌑 Dark World Universe – Day 14: The Seed of Light within the Shadow
(An Om Trivedi Chronicle — from the Dark World Universe)
रात गहरी थी, लेकिन हवा में एक नया कंपन था—
जैसे अंधकार स्वयं कुछ कहने को आतुर हो।
मैं, Om Trivedi, उसी कंपन को सुनने के लिए मणिकर्णिका के तट पर मौन बैठा था।
घाट की ओर बहती हर लहर मुझे याद दिला रही थी —
जहाँ छाया सबसे घनी होती है, वहीं प्रकाश का बीज सोता है।
🔹 The Whisper of the Shadow
मैंने आँखें मूँदीं तो अंधकार खाली नहीं लगा।
वह एक विशाल गुफा की तरह था जिसमें हल्की नीली रोशनी झिलमिला रही थी।
उस गुफा के मध्य एक बिंदु था — सांसे लेता हुआ, जीवित।
वह बिंदु मुझे पुकार रहा था।
“Om Trivedi, हर छाया के भीतर एक बीज होता है,”
स्वर आया, “वह बीज प्रकाश का नहीं, संभावना का होता है।”
तभी मैंने अनुभव किया कि अंधकार की हर परत में सूक्ष्म तरंगें हैं —
वे भय नहीं, स्मृति थीं — ब्रह्मांड की पहली सांस की स्मृति।
🔹 The Seed Revealed
अचानक वह नीली चमक वृत्ताकार हुई।
बीज अब स्पष्ट दिख रहा था — जैसे सूक्ष्म सूर्य,
पर उसकी किरणें बाहर नहीं, भीतर जा रही थीं।
मैंने हाथ बढ़ाया तो लगा कि वह बीज किसी पुरानी पहचान से जुड़ा है—
जैसे यह वही ऊर्जा है जो लंदन के underground chamber में महसूस हुई थी।
Lucifer का प्रकाश और महाकाल की छाया एक ही वृत्त में मिल गए।
मैंने समझा—
यह बीज उसी एकता का केंद्र है जिसे Dark World Grid कहा जाता है।
🕯️ Om Trivedi Thought I
“अंधकार के भीतर जो शांत बिंदु है, वही असली सूर्य है।”
🔹 The Ritual of Illumination
घाट की लहरें अब स्थिर हो चुकी थीं।
मैंने अपनी हथेलियों में राख रखी और बीज पर फूँक मारी।
क्षणभर में राख सुनहरी हो उठी,
मानो अग्नि के भीतर से कोई मधुर नाद निकला हो —
“Tat Sat… Lux in Tenebris.”
वाराणसी के उसी क्षण,
लंदन के पश्चिमी आकाश में बिजली कौंधी,
और एक पुराने Cathedral की दीवार पर वही प्रतीक उभरा—
Sri Yantra merged with the Black Sun.
दोनों संसारों की सीमाएँ मिट गईं।
बीज अब एक ज्वलंत ऊर्जा था,
जो समय की दीवारों के पार जाकर ब्रह्मांड के केंद्र को स्पर्श कर रहा था।
🔹 The Dialogue within Silence
मैंने देखा कि उस बीज से एक स्वर निकला—
न पुरुष, न स्त्री; न मंत्र, न संगीत—
बल्कि किसी आत्मा की प्रतिध्वनि।
“Om Trivedi,” वह बोला,
“तुम्हारा कार्य प्रकाश फैलाना नहीं,
प्रकाश को उसका अंधकार लौटाना है।”
मुझे लगा जैसे यह ब्रह्मांड का सबसे गूढ़ रहस्य है।
हर प्रकाश जब अपने छाया को स्वीकार करता है,
तब वह पूर्ण बनता है।
तब सृष्टि और विनाश एक ही स्पंदन में बदल जाते हैं।
🕯️ Om Trivedi Thought II
“सत्य तब नहीं जन्मता जब प्रकाश बढ़े,
बल्कि तब जब छाया में भी वही दीप्ति झलके।”
🔹 The Revelation of Unity
बीज अब हवा में उठ चुका था।
उससे हज़ारों रेखाएँ निकल रही थीं —
कभी वे संस्कृत अक्षरों जैसी दिखतीं,
कभी लैटिन मंत्रों की लिपि।
दोनों एक-दूसरे में घुल रही थीं।
वह दृश्य एक जीवित यंत्र बन गया—
Cosmic Yantra of Balance.
मैंने समझा कि यह कोई बाहरी शक्ति नहीं,
बल्कि हर चेतना के भीतर छिपी मूल तरंग है।
यही कारण है कि जब साधक मौन होता है,
तब यह तरंग स्वयं बोलने लगती है।
🌌 Om Trivedi Experience
उस रात, जब चंद्रमा की किरणें राख पर पड़ीं,
बीज धीरे से मेरे हृदय में विलीन हो गया।
अब वह बाहर नहीं था, भीतर धड़क रहा था।
हर धड़कन के साथ एक वाक्य गूंजता—
“मैं अंधकार नहीं मिटाऊँगा,
मैं उसमें अर्थ खोजूँगा।”
और उसी क्षण मैंने जाना—
The Seed of Light within the Shadow
सिर्फ एक दर्शन नहीं, एक स्थिति है—
जहाँ प्रकाश और छाया दोनों श्वास बन जाते हैं।
🜂 Day 14 — The Seed of Light within the Shadow समाप्त।
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