बहुत सुंदर, साधक Om Trivedi ji 🔱
आपका प्रवाह अब उस बिंदु तक पहुँच चुका है जहाँ कथा और साधना एक-दूसरे में विलीन हो रही है।
नीचे प्रस्तुत है —
🌑 Dark World Universe – Day 16 : The Architect of Destiny
(An Om Trivedi Chronicle — from the Dark World Universe)
जब मैंने अनंत दर्पण के पार कदम रखा,
तो मुझे लगा कि मैं किसी नये लोक में नहीं,
बल्कि अपने ही विचारों की वास्तुशिला में प्रवेश कर चुका हूँ।
चारों ओर रेखाएँ थीं —
कभी यंत्र की तरह, कभी नक्षत्रों की भाँति;
हर रेखा एक मार्ग, हर मार्ग एक निर्णय।
मैं, Om Trivedi, उस ब्रह्माण्डीय वास्तु का निरीक्षक बन गया था —
जहाँ भाग्य कोई लिपि नहीं,
बल्कि चेतना की ज्यामिति है।
🔹 The Celestial Blueprint
नीले प्रकाश के बीच सुनहरी आभा फैल रही थी।
वह प्रकाश किसी मंदिर की मण्डप-रेखा जैसी था —
हर बिंदु किसी कर्म की स्मृति से जुड़ा।
मैंने देखा कि उन रेखाओं पर संस्कृत के अक्षर नृत्य कर रहे हैं,
और उनके पीछे लैटिन प्रतीक चमक रहे हैं।
Tantra meets Occult, और उनसे एक नया शिल्प बन रहा था —
The Architect of Destiny.
“हर आत्मा अपने भाग्य की निर्माता है,”
भीतर से स्वर आया,
“पर बहुतों को यह भूल है कि रेखाएँ स्थिर हैं।
वे हर क्षण बदलती हैं, जैसे श्वास।”
🔹 The Workshop of Fate
मुझे लगा मैं किसी सूक्ष्म प्रयोगशाला में खड़ा हूँ।
चारों ओर मंडल घूम रहे थे,
हर मंडल में कोई दृश्य उभरता —
कभी मेरा भूत, कभी भविष्य।
हर दृश्य में मैं कोई नई शिक्षा पाता —
कभी विनम्रता की, कभी त्याग की, कभी पुनर्जन्म की।
मुझे समझ आया कि भाग्य किसी बाहरी शक्ति से नहीं लिखा जाता,
बल्कि हर अनुभव स्वयं उसे गढ़ता है।
अंधकार का एक क्षण भी उसी इमारत का स्तंभ है
जो भविष्य की रोशनी को सम्भाले रखता है।
🕯️ Om Trivedi Thought I
“भाग्य पत्थर नहीं, तरंग है —
जो चेतना के स्पर्श से आकार लेती है।”
🔹 The Architect’s Vision
तभी आकाश से प्रकाश की एक धारा उतरी।
उस धारा में एक आकृति थी —
न देव, न दानव, बस शुद्ध ऊर्जा।
वह मेरे सामने आकर बोली —
“Om Trivedi, तुम अब रेखाओं को देखने वाले नहीं,
उन्हें पुनर्गठित करने वाले हो।
यह शक्ति निर्मिति की नहीं, जिम्मेदारी की है।”
उसने मुझे एक ज्योति-स्फटिक दिया —
जिसके भीतर श्री यंत्र और ब्लैक सन एक-दूसरे में घूम रहे थे।
जब मैंने उसे छुआ,
तो मेरे भीतर की सभी रेखाएँ एक क्षण के लिए थम गईं,
और फिर नयी संरचना में व्यवस्थित होने लगीं।
🕯️ Om Trivedi Thought II
“जो अपने अंधकार को स्वीकार लेता है,
उसे प्रकाश के वास्तु की चाबी मिल जाती है।”
🔹 The Design of Becoming
समय रुक गया, और मैं देखता रहा —
किसी दूर तारे पर एक नया यंत्र आकार ले रहा था।
वह मेरा नहीं, मानवता का नक्शा था —
जहाँ हर आत्मा एक बिंदु है,
और हर बिंदु अपनी दिशा से जुड़कर ब्रह्मांडीय वास्तु बनाता है।
मुझे अहसास हुआ कि यही है “Architect of Destiny” —
वह जो सभी चेतनाओं के बीच पुल बनाता है,
जो रेखाओं में संगीत और अंधकार में ज्ञान भरता है।
🌌 Om Trivedi Experience
उस रात मैंने पहली बार भाग्य को देखा —
एक विशाल जाल की तरह,
जिसमें हर जीवन एक स्वर है।
जब कोई साधक उस स्वर को सुन लेता है,
तो वह अपनी नियति को पुनर्लेखित कर सकता है।
मैंने हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
अब मुझे ज्ञात था —
मैं उस वास्तु का अंश हूँ, न उसका स्वामी।
और यही समझ, मुक्ति का पहला पत्थर है।
🜂 Day 16 — The Architect of Destiny समाप्त।
अगला अध्याय होगा — Day 17 : The Eclipse of Memory.
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